कपिल शर्मा की कहानी सिर्फ हंसी से भरी नहीं है, यह टूटने, बिखरने और हर बार फिर से खड़े होने की कहानी है। मंच पर लोगों को गुदगुदाने वाला यह कलाकार अपनी निजी जिंदगी में कई ऐसे दौर से गुजरा, जहां तालियों की गूंज की जगह सन्नाटा था, लेकिन शायद यही सन्नाटा उन्हें और मजबूत बनाता गया। अमृतसर की गलियों से निकला एक लड़का, जिसकी आंखों में सिंगर बनने का सपना था, मुंबई पहुंचा तो जेब में बहुत कुछ नहीं था, सिवाय उम्मीद के। शुरुआत आसान नहीं थी। संघर्ष, असुरक्षा और अनिश्चितता ने हर कदम पर परीक्षा ली। फिर 2004 में पिता के निधन ने जैसे जिंदगी की धुरी ही हिला दी। वह दौर कपिल के लिए सबसे कठिन था। परिवार की जिम्मेदारियां, अधूरे सपने और भीतर का खालीपन, सब कुछ एक साथ सामने खड़ा था।
इस बीच किस्मत ने एक और मौका दिया। 2007 में ‘द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ का तीसरा सीजन जीतकर कपिल ने न सिर्फ ट्रॉफी, बल्कि पहचान भी हासिल की। ₹10 लाख का चेक हाथ में था, पर दिल में एक कसक थी 'काश पापा आज होते।' वह पल उनके लिए जीत से ज्यादा एक भावनात्मक याद था। बाद में जब उनका शो शुरू हुआ तो वह रात 9 बजे अपने घर के बाहर खड़े होकर पड़ोस के घरों से आती हंसी सुनते रहे। हर ठहाके के साथ उन्हें पिता की याद आती रही। वह सोचते अगर पापा जिंदा होते तो कितना गर्व महसूस करते। ‘कॉमेडी सर्कस’ की जीतों ने उनके आत्मविश्वास को पंख दिए और 2013 में ‘कॉमेडी नाइट्स विद कपिल’ के साथ उन्होंने भारतीय टेलीविजन का चेहरा ही बदल दिया। उनके शो ने घर-घर में जगह बनाई।
ETimes को दिए एक इंटरव्यू में कपिल ने अपनी जिंदगी के उतार-चढ़ाव के बारे में बात की और कहा, 'हर दौर का अपना चार्म था। बचपन अलग था। जब मेरे पिता थे, वह दौर अलग था। 2004 में उनके गुजर जाने के बाद जिंदगी पूरी तरह से पटरी से उतर गई। फिर मुझे टीवी पर एक और मौका मिला और मैं वापस पटरी पर आ गया। 36 साल की उम्र में डिप्रेशन ने मुझे बुरी तरह मारा और मैं पूरी तरह से टूट गया। लोग कहने लगे, ‘वह खत्म हो गया है।’ फिर मैंने शादी कर ली। फिर शो वापस आया। फिर मैंने फिर से 300+ एपिसोड किए।'
उन्होंने अपने पिता को हर दिन याद करने के बारे में भी बात की और कहा, 'बीता हुआ कल कभी नहीं बदलता। जो चले गए वो वापस नहीं आएंगे। जब मैंने ट्रॉफी (द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज सीजन 3) जीती और मुझे ₹10 लाख का चेक मिला तो मैं यह सोचकर रोया… काश मेरे पिता आज यहां होते। जब मेरा शो शुरू हुआ, मुझे याद है कि मैं रात 9 बजे अपने घर के बाहर चुपचाप खड़ा था। सोसाइटी के हर घर में टीवी चल रहे थे और मैं लोगों की हंसी सुन सकता था। मैंने मन में सोचा, अगर पापा जिंदा होते तो कितने खुश होते। मैं उन्हें हर दिन याद करता हूं, लेकिन कुछ पल ज्यादा मुश्किल होते हैं।'
किरदार, पंचलाइन और उनकी सहज कॉमिक टाइमिंग ने उन्हें देश का सबसे लोकप्रिय कॉमेडियन बना दिया। वह सिर्फ एक कलाकार नहीं, बल्कि हर परिवार की शाम का हिस्सा बन गए, लेकिन सफलता की ऊंचाइयों के साथ दबाव भी आया। 36 साल की उम्र में कपिल डिप्रेशन की चपेट में आ गए। यह वह समय था जब आलोचनाएं तेज थीं और अफवाहें भी। कई लोगों ने कहना शुरू कर दिया, 'वह खत्म हो गया।' पर कपिल की कहानी यहां खत्म नहीं होती। उन्होंने खुद को समय दिया, संभाला और जिंदगी को एक नया मोड़ दिया शादी के रूप में। निजी जीवन में स्थिरता ने उन्हें फिर से मजबूती दी।
इसके बाद उन्होंने वापसी की और ऐसी कि 300 से अधिक एपिसोड्स के साथ फिर से दर्शकों का दिल जीत लिया। फिल्मों में भी उन्होंने कदम रखा। 2015 में ‘किस किसको प्यार करूं’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया, जो व्यावसायिक रूप से सफल रही। इसके बाद ‘फिरंगी’, ‘ज्विविगाटो’ और ‘क्रू’ जैसी फिल्मों में अलग-अलग किरदार निभाकर उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा दिखाई। हाल ही में ‘किस किसको प्यार करूं 2’ में भी नजर आए। आज कपिल नेटफ्लिक्स पर ‘द ग्रेट इंडियन कपिल शो’ के जरिए दर्शकों को हंसा रहे हैं। नवजोत सिंह सिद्धू, अर्चना पूरन सिंह, कीकू शारदा, सुनील ग्रोवर और कृष्णा अभिषेक जैसे साथियों के साथ यह शो चार सीजन पूरे कर चुका है और पांचवें सीजन के लिए भी तैयार है।
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